Abstract
Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(10): 273-275
छत्तीसगढ़ी लोकगीतों में गांधीवाद
Author Name: Dr. Janki Choudhary
Abstract
<p>छत्तीसगढ़ी लोक गीतों में गांधी जी सत्य<em>, </em>अहिंसा<em>, </em>प्रेम<em>, </em>सौहार्द<em>, </em>सहिष्णुता और जन उद्धारक के प्रतीक है। गांधी जी के विचार और देश के प्रति प्रेम<em>, </em>त्याग<em>, </em>समर्पण का भाव ने छत्तीसगढ़ी जनमानस को एक नई दिशा प्रदान किया है। गांधी जी के विचारधारा को जनमानस ने सदैव आत्मसात किया है और साहित्य में भी प्रतिबिंबित किया है। गांधी जी एक महान राजनीतिज्ञ<em>, </em>दार्शनिक थे<em>, </em>उससे पहले वह मानवता के अग्रदूत रहे हैं। समाज में कभी भी स्त्री-पुरुष में मेद न करते हुए दोनों कों समान अवसर व अधिकार देने के हिमायती रहे। खासकर स्त्री वर्ग और दलित वर्ग को समाज में एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गांधी जी के अगुवाई में छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता आंदोलन<em>, </em>खादी आंदोलन<em>, </em>मद्रद्यनिषेध आंदोलन का सफल आयोजन भी हुआ। गांधी जी के देश को स्वतंत्र कराने व समाज सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका को छत्तीसगढ़ी लोकगीतकारों ने अपनी रचना में सहज मुखरित करता आया है।</p>
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Keywords
छत्तीसगढ़ी लोकसाहित्य, छत्तीसगढ़ी लोकगीत, महात्मा गांधी, समाज सुधार आंदोलन।
