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MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2024; 2(12): 60-64

महिलाओं के सामाजिक एवं कानूनी अधिकारों के उत्थान में डॉ. बी. आर. अंबेडकर का योगदान: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन

Author Name: डॉ. स्वदेश कुमार

1. एसोसिएट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग , आगरा कॉलेज, आगरा उत्तर प्रदेश, भारत

Abstract

<p>भारतीय समाज में महिलाओं की सामाजिक और कानूनी स्थिति लंबे समय तक पितृसत्तात्मक सामाजिक संरचनाओं, सांस्कृतिक मान्यताओं और आर्थिक निर्भरता से प्रभावित रही है। परंपरागत समाज में महिलाओं को शिक्षा, संपत्ति, राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक निर्णयों में सीमित अधिकार प्राप्त थे। इस ऐतिहासिक असमानता को समाप्त करने और महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए अनेक सामाजिक सुधार आंदोलनों का उदय हुआ। आधुनिक भारत में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके सशक्तिकरण की दिशा में डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>

<p>डॉ. अंबेडकर ने सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों को अपने सामाजिक और राजनीतिक दर्शन का आधार बनाया। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सम्मान को एक न्यायपूर्ण समाज की अनिवार्य शर्त माना। भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके माध्यम से उन्होंने महिलाओं के लिए समानता, स्वतंत्रता और न्याय के संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित किए। संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के माध्यम से महिलाओं को समान अवसर प्रदान किए गए तथा लैंगिक भेदभाव को असंवैधानिक घोषित किया गया।</p>

<p>इसके अतिरिक्त डॉ. अंबेडकर ने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में समान अधिकार दिलाने का प्रयास किया। यद्यपि उस समय इस विधेयक का व्यापक विरोध हुआ, फिर भी बाद में इसके आधार पर कई महत्वपूर्ण कानून बनाए गए जिनसे महिलाओं के अधिकारों को मजबूत किया गया। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य महिलाओं के सामाजिक और कानूनी अधिकारों के उत्थान में डॉ. अंबेडकर के योगदान का विश्लेषणात्मक अध्ययन करना है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि अंबेडकर की नीतियाँ और विचार आधुनिक भारत में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के महत्वपूर्ण आधार बने हैं।</p>

Keywords

अंबेडकर, महिला अधिकार, सामाजिक न्याय, संविधान, लैंगिक समानता