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MRR Journal

Abstract

Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(9): 125-131

लैंगिक भेदभाव एवं शैक्षणिक व सामाजिक मूल्यों के विकास का जीवन पर प्रभाव

Author Name: डॉ. विभाकर उपमन्यु

1. सहायक प्राध्यापक, विरायतन बी.एड. कॉलेज पावापुरी,राजगीर, बिहार,भारत

Abstract

<p>किसी भी व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान होता है <em>| </em>शिक्षा के द्वारा ही विचार आध्यात्मिक मूल्य<em>, </em>महत्वाकांक्षाओं का विकास और संस्कृति के संरक्षण का कार्य भी किया जाता है <em>| </em>शिक्षा के कारण सामाजिक मूल्यों में सकारात्मक परिवर्तन आए हैं <em>| </em>शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन का घनिष्ठ&nbsp; संबंध है <em>| </em>ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना से लेकर <em>100</em> वर्षों तक अंग्रेजों ने देश में शिक्षा को प्रोत्साहित करने में कोई रुचि नहीं दिखाई थी <em>| </em>शिक्षक व विद्यार्थी भारतीय संस्कृति सदाचार एवं नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने की बजाय भौतिकता के आकर्षण के पीछे भागते दिखाई देते हैं <em>| </em>महान शैक्षिक विचारक जे. कृष्णमूर्ति एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आधारशिला रखने को कृत संकल्प हुए<em>, </em>जो विद्यार्थी को वास्तविकता का बोध कराते हुए प्रेम करुणा प्रज्ञा संवेदनशीलता व अंतः ज्ञान आदि गुणों से युक्त बनाए बालकों का व्यक्तित्व निर्माण करना उनका उद्देश्य था <em>| </em>स्वामी विवेकानंद जी वर्तमान शिक्षा प्रणाली के कटु आलोचक और व्यवहारिक शिक्षा के प्रबल समर्थक थे <em>|</em>जिसकी आजकल की परिस्थितियों में अत्यंत आवश्यकता है <em>| </em>आज जबकि भारत या पूरा विश्व मूल्यों को खो देने के कगार पर है <em>| </em>मौजूदा समय की शिक्षा व्यवस्था केवल बेरोजगारों की भीड़ तैयार कर रही है<em>, </em>इसमें बेशक शाब्दिक ज्ञान बहुत हो लेकिन यह भी सच है कि ज्ञान अल्पकालिक होकर रह गया <em>| </em>देश की शिक्षा व्यवस्था यह गहरी नहीं होगी वह ज्ञान का प्रयास नहीं होगी<em>, </em>तो देश में सांस्कृतिक और मौलिक पास नहीं रोका जा सकता <em>| </em>हम दुनिया समझने निकले हैं<em>, </em>लेकिन देश की संस्कृति देश का अतीत देश का साहित्य हम नहीं समझ पाए<em>, </em>क्योंकि मैकाले की शिक्षा व्यवस्था की मंशा ही यही थी कि हम अपने आप अपनी संस्कृति और अपने देश के आदेश से दूर होते जाएँ <em>| </em>प्रौद्योगिकी यह जीवन और समाज के हर पहलू को छू रही है <em>| </em>आजादी के बाद से हमारे देश में तकनीकी शिक्षा प्रणाली व्यापक रूप में उभरी है <em>| </em>तकनीकी शिक्षा के मानक को बनाए रखने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की स्थापना <em>1945</em> में हुई थी निगरानी और मूल्यांकन प्रमाणीकरण और पुरस्कारों की समानता बनाए रखना और देश में तकनीकी शिक्षा के समेकित और एकीकृत विकास और प्रबंधन को सुनिश्चित करना <em>| </em>आज का नागरिक अपना जीवन अपने अंदाज में व्यतीत करना चाहता है <em>| </em>विशेषकर अभिभावकों और शिक्षकों का मार्गदर्शन बच्चों के जीवन जीने की शैली को बहुत हद तक प्रभावित करता है <em>| </em>हमें उनकी भावनाओं को ठेस ना पहुंचे आते हुए परिवार समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दायित्वों के प्रति भी जागरूक करना होगा <em>| </em>किसी भी देश को पूर्ण रूप से विकसित होने के लिए वहां की महिलाओं का शिक्षित होना जरूरी है <em>| </em>महिला शिक्षा एक बड़ा मुद्दा है <em>| </em>भारत को आर्थिक रूप से तथा सामाजिक रूप से विकसित बनाने में शिक्षित महिला उस तरह का औजार है <em>| </em>जो भारतीय समाज पर और अपने परिवार पर अपने हुनर तथा ज्ञान से सकारात्मक प्रभाव डालती है <em>|</em></p>

Keywords

लिंग, भेदभाव, शैक्षिक, सामाजिक, मूल्य, शहरीकरण, वरीयता और दृष्टिकोण |