Abstract
Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(9): 132-135
समकालीन महिला उपन्यासकारों में ममता कालिया का रचनात्मक अवदान
Author Name: विवेक कुमार, प्रो. आनन्द कुमार सिंह
Abstract
<p>समकालीन हिंदी कथा-साहित्य में महिला रचनाकारों ने स्त्री जीवन<em>,</em> उसकी आकांक्षाओं<em>,</em> संघर्षों और सामाजिक स्थिति को अभिव्यक्ति देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस परंपरा में ममता कालिया का नाम विशिष्ट रचनात्मक पहचान के साथ सामने आता है। उन्होंने अपने उपन्यासों और कहानियों में मध्यवर्गीय जीवन के यथार्थ<em>,</em> पारिवारिक संबंधों, स्त्री-पुरुष संबंधों<em>,</em> आर्थिक दबावों महानगरीय जीवन तथा बदलती सामाजिक संरचना को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।</p>
<p>ममता कालिया का साहित्य केवल स्त्री-केंद्रित समस्याओं तक सीमित नहीं है। उनके यहाँ पुरुष मनोविज्ञान<em>,</em> पारिवारिक मूल्य<em>,</em> आर्थिक संघर्ष<em>,</em> रोजगार<em>,</em> व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा<em>,</em> उपभोक्तावादी संस्कृति और आधुनिक जीवन की जटिलताएँ भी पर्याप्त महत्त्व रखती हैं। यही व्यापक दृष्टि उनके कथा-साहित्य को समकालीन हिंदी साहित्य में अलग पहचान प्रदान करती है। मूल आलेख भी उनके साहित्य में स्त्री और पुरुष दोनों के मनोविज्ञान तथा सामाजिक यथार्थ के चित्रण को रेखांकित करता है।</p>
Keywords
ममता कालिया, महिला उपन्यासकार, स्त्री-विमर्श, मध्यवर्ग, महानगरीय जीवन, भूमंडलीकरण, उपभोक्तावाद, मानवीय संवेदना।
