पश्चिमी उत्तर प्रदेश में माध्यमिक स्तर का विद्यार्थी केवल स्कूल में नहीं पढ़ता, वह अपने घर के आँगन में भी पढ़ता है। मुजफ्फरनगर के एक ही मोहल्ले में दो घर हैं — एक घर में शाम को 7 बजे पिता पूछता है — "बेटा, आज क्या पढ़ा?", दूसरे घर में उसी समय पिता कहता है — "बेटा, भैंस को पानी पिला दे, पढ़ाई बाद में कर लियो।" दोनों घरों के बच्चे एक ही कक्षा में बैठते हैं, पर उनकी उपलब्धि में जमीन-आसमान का अंतर क्यों? प्रस्तुत शोध इसी प्रश्न का उत्तर है।
शोध का उद्देश्य पारिवारिक वातावरण (माता-पिता का प्यार, झगड़ा, पढ़ाई में मदद, अनुशासन) और सामाजिक दृष्टिकोण (समाज शिक्षा को क्या मानता है — बोझ या गहना?) का माध्यमिक स्तर (कक्षा 9-10) के विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि पर प्रभाव देखना है। 600 विद्यार्थियों (300 ग्रामीण, 300 शहरी, मुजफ्फरनगर, मेरठ, शामली) पर अध्ययन।
उपकरण:
(1) डॉ. के.एस. मिश्रा पारिवारिक वातावरण मापनी (2023, 50 पद — 8 आयाम),
(2) डॉ. आर.के. सिंह सामाजिक दृष्टिकोण मापनी (2024 — शिक्षा के प्रति समाज का नजरिया — रूढ़िवादी बनाम प्रगतिशील),
(3) शैक्षिक उपलब्धि — कक्षा 9 वार्षिक + कक्षा 10 प्री-बोर्ड का औसत %।
मुख्य निष्कर्ष:
(अ) पारिवारिक वातावरण और उपलब्धि में r=+0.71 उच्च धनात्मक।
(ब) सामाजिक दृष्टिकोण और उपलब्धि में r = +0.64।
(स) जहाँ परिवार में रोज झगड़ा, वहाँ उपलब्धि 12% कम।
(द) ग्रामीण क्षेत्र में सामाजिक दृष्टिकोण का प्रभाव शहरी से अधिक — ग्रामीण में लड़कियों की उपलब्धि पर "लड़की ज्यादा पढ़कर क्या करेगी?" वाला दृष्टिकोण 18% नंबर गिरा देता है।
(य) Regression में दोनों मिलकर 62% उपलब्धि तय करते हैं।
पारिवारिक वातावरण, सामाजिक दृष्टिकोण, शैक्षिक उपलब्धि, माध्यमिक स्तर के विद्यार्थी, ग्रामीण-शहरी अंतर, लैंगिक असमानता।
ममता रानी, डॉ. सारिका गोयल. माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि पर पारिवारिक वातावरण एवं सामाजिक दृष्टिकोण के प्रभाव का अध्ययन - पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विशेष संदर्भ में. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2024; 2(7):87-90
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