यह शोध-पत्र पुनर्गठित अजमेर जिले के विशेष संदर्भ में सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) की अवधारणा, संभावनाओं तथा चुनौतियों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि सतत पर्यटन केवल आर्थिक विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन तथा स्थानीय समुदाय के सशक्तिकरण का भी महत्वपूर्ण साधन है। अजमेर जिला, जो ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध है, पर्यटन की अपार संभावनाएँ रखता है।
शोध में अजमेर के प्रमुख पर्यटन स्थलों, ग्रामीण पर्यटन, महिला-केंद्रित पर्यटन तथा इको-टूरिज्म की संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं—जैसे PRASHAD, स्वदेश दर्शन योजना तथा राजस्थान पर्यटन नीति—की भूमिका का भी मूल्यांकन किया गया है। अध्ययन यह भी इंगित करता है कि यदि स्थानीय समुदाय की भागीदारी, पर्यावरणीय संतुलन तथा समावेशी विकास को प्राथमिकता दी जाए, तो पर्यटन क्षेत्र अजमेर जिले में रोजगार सृजन, आय वृद्धि तथा सामाजिक-सांस्कृतिक विकास का सशक्त माध्यम बन सकता है।
अंततः, शोध यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि सतत पर्यटन मॉडल अपनाकर अजमेर जिले को एक आदर्श पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा सकता है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।
सतत पर्यटन, अजमेर जिला, इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत, समावेशी विकास, पर्यटन नीति, पर्यावरण संरक्षण
. सतत विकास-पुनर्गठित अजमेर जिले के विशेष संन्दर्भ में. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(SP1):76-80
Download PDF