सर छोटू राम (1881–1945) औपनिवेशिक भारत के उन गिने-चुने राजनेताओं में से थे जिन्होंने न केवल कृषि सुधारों की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किए, बल्कि पंजाब के औद्योगिक विकास को भी एक ठोस आधार प्रदान किया। यह शोध पत्र उनके उन प्रमुख योगदानों का विश्लेषण करता है जो उन्होंने पंजाब की मिश्रित अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करने, श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने और स्वदेशी उद्योगों को प्राथमिकता देने के संदर्भ में किए। उनके कार्यकाल में पंजाब में औद्योगिक इकाइयों की संख्या 1936 में 71 से बढ़कर 1938 में 98 हो गई, और वार्षिक निवेश 13 लाख रुपये से बढ़कर 24 लाख रुपये हो गया। यह शोध उनकी नीतियों, भाषणों और विधानसभा में की गई पहलों के माध्यम से उनकी समग्र दृष्टि को प्रस्तुत करता है।
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ललित कुमार, राम सिंह गुरना. सर छोटू राम का औद्योगिक विकास में योगदान: औपनिवेशिक पंजाब के आर्थिक पुनर्निर्माण का एक ऐतिहासिक अध्ययन. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(5):381-385
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