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Indian Journal of Modern Research and Reviews, 2026; 4(9):125-131

लैंगिक भेदभाव एवं शैक्षणिक व सामाजिक मूल्यों के विकास का जीवन पर प्रभाव

Authors: डॉ. विभाकर उपमन्यु;

1. सहायक प्राध्यापक, विरायतन बी.एड. कॉलेज पावापुरी,राजगीर, बिहार,भारत

Paper Type: Research Paper
Article Information
Received: 2026-08-07   |   Accepted: 2026-09-04   |   Published: 2026-09-11
Abstract

किसी भी व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान होता है | शिक्षा के द्वारा ही विचार आध्यात्मिक मूल्य, महत्वाकांक्षाओं का विकास और संस्कृति के संरक्षण का कार्य भी किया जाता है | शिक्षा के कारण सामाजिक मूल्यों में सकारात्मक परिवर्तन आए हैं | शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन का घनिष्ठ  संबंध है | ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना से लेकर 100 वर्षों तक अंग्रेजों ने देश में शिक्षा को प्रोत्साहित करने में कोई रुचि नहीं दिखाई थी | शिक्षक व विद्यार्थी भारतीय संस्कृति सदाचार एवं नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने की बजाय भौतिकता के आकर्षण के पीछे भागते दिखाई देते हैं | महान शैक्षिक विचारक जे. कृष्णमूर्ति एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आधारशिला रखने को कृत संकल्प हुए, जो विद्यार्थी को वास्तविकता का बोध कराते हुए प्रेम करुणा प्रज्ञा संवेदनशीलता व अंतः ज्ञान आदि गुणों से युक्त बनाए बालकों का व्यक्तित्व निर्माण करना उनका उद्देश्य था | स्वामी विवेकानंद जी वर्तमान शिक्षा प्रणाली के कटु आलोचक और व्यवहारिक शिक्षा के प्रबल समर्थक थे |जिसकी आजकल की परिस्थितियों में अत्यंत आवश्यकता है | आज जबकि भारत या पूरा विश्व मूल्यों को खो देने के कगार पर है | मौजूदा समय की शिक्षा व्यवस्था केवल बेरोजगारों की भीड़ तैयार कर रही है, इसमें बेशक शाब्दिक ज्ञान बहुत हो लेकिन यह भी सच है कि ज्ञान अल्पकालिक होकर रह गया | देश की शिक्षा व्यवस्था यह गहरी नहीं होगी वह ज्ञान का प्रयास नहीं होगी, तो देश में सांस्कृतिक और मौलिक पास नहीं रोका जा सकता | हम दुनिया समझने निकले हैं, लेकिन देश की संस्कृति देश का अतीत देश का साहित्य हम नहीं समझ पाए, क्योंकि मैकाले की शिक्षा व्यवस्था की मंशा ही यही थी कि हम अपने आप अपनी संस्कृति और अपने देश के आदेश से दूर होते जाएँ | प्रौद्योगिकी यह जीवन और समाज के हर पहलू को छू रही है | आजादी के बाद से हमारे देश में तकनीकी शिक्षा प्रणाली व्यापक रूप में उभरी है | तकनीकी शिक्षा के मानक को बनाए रखने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की स्थापना 1945 में हुई थी निगरानी और मूल्यांकन प्रमाणीकरण और पुरस्कारों की समानता बनाए रखना और देश में तकनीकी शिक्षा के समेकित और एकीकृत विकास और प्रबंधन को सुनिश्चित करना | आज का नागरिक अपना जीवन अपने अंदाज में व्यतीत करना चाहता है | विशेषकर अभिभावकों और शिक्षकों का मार्गदर्शन बच्चों के जीवन जीने की शैली को बहुत हद तक प्रभावित करता है | हमें उनकी भावनाओं को ठेस ना पहुंचे आते हुए परिवार समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दायित्वों के प्रति भी जागरूक करना होगा | किसी भी देश को पूर्ण रूप से विकसित होने के लिए वहां की महिलाओं का शिक्षित होना जरूरी है | महिला शिक्षा एक बड़ा मुद्दा है | भारत को आर्थिक रूप से तथा सामाजिक रूप से विकसित बनाने में शिक्षित महिला उस तरह का औजार है | जो भारतीय समाज पर और अपने परिवार पर अपने हुनर तथा ज्ञान से सकारात्मक प्रभाव डालती है |

Keywords

लिंग, भेदभाव, शैक्षिक, सामाजिक, मूल्य, शहरीकरण, वरीयता और दृष्टिकोण |

How to Cite

डॉ. विभाकर उपमन्यु. लैंगिक भेदभाव एवं शैक्षणिक व सामाजिक मूल्यों के विकास का जीवन पर प्रभाव. Indian Journal of Modern Research and Reviews. 2026; 4(9):125-131

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